322635194 गाजियाबाद: बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगने वाले गैंग का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड सहित दो गिरफ्तार

गाजियाबाद: बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगने वाले गैंग का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड सहित दो गिरफ्तार

 

गाजियाबाद: बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगने वाले गैंग का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड सहित दो गिरफ्तार











बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा


गाजियाबाद की साइबर थाना पुलिस ने बीमा पॉलिसी के नाम पर देशभर में ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के मास्टरमाइंड और एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने जानकारी दी है कि इस गिरोह ने नौ राज्यों में 39 ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया है।




मास्टरमाइंड और दो आरोपियों की गिरफ्तारी


पुलिस के अनुसार, गिरोह के मास्टरमाइंड ऋषभ राजपूत और सुमित कुमार रावत को गिरफ्तार किया गया है। ऋषभ का मूल निवास वाराणसी के अर्दली बाजार का है, जबकि सुमित विजयनगर सेक्टर-8 का निवासी है। इन आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन, आधार कार्ड, दो पैन कार्ड, चार सिम कार्ड और अन्य सामान बरामद हुआ है।




ठगी के तरीके


एडीसीपी क्राइम सच्चिदानंद के अनुसार, आरोपी बीमा धारकों को एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस के कर्मचारी बनकर फोन करते थे। वे पॉलिसी के नवीनीकरण के नाम पर प्रीमियम जमा करने के लिए पीड़ितों से पैसे मांगते थे। पीड़ितों की पॉलिसी में वास्तव में किया लंबित प्रीमियम होते थे, जिसके कारण वे झांसे में आ जाते थे और आरोपी द्वारा बताए गए खाते में पैसे ट्रांसफर कर देते थे। इसके बाद, आरोपी फर्जी रसीदें भेजते थे।





फहाद का भूमिका


गिरोह के सदस्य फहाद, जो वैशाली का निवासी है, फर्जी आईडी के सिम कार्ड और बैंक खाते प्रदान करता था। फहाद ठगी गई रकम का 25 प्रतिशत कमीशन काटकर बाकी रकम ऋषभ को नकद देता था। ऋषभ इस रकम से सुमित को सैलरी और खर्चे के लिए पैसे देता था। आरोपी ठगी के बाद सिम कार्ड को तोड़कर फेंक देते थे।





ठगी की घटनाएं और राज्य


पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने विभिन्न राज्यों में ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर, पीलीभीत, सहारनपुर, लखनऊ, महोबा, कौशांबी, आगरा, अयोध्या, बरेली, मेरठ और गोंडा के कई लोग इसके शिकार हुए हैं। राजस्थान के आठ, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड के तीन-तीन और बिहार, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड और तेलंगाना के एक-एक पीड़ित को भी ठगा गया है।



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पुलिस की जांच और गिरफ्तारियां


साइबर थाना पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और अन्य तकनीकों का उपयोग करके ठगी के मामलों की जांच की और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि गिरोह के सदस्य नोएडा सेक्टर-63 स्थित एक कॉल सेंटर में काम करते थे, जहां से उन्होंने एचडीएफसी के बीमाधारकों का डेटा चोरी किया था। ये आरोपी वर्किंग-डे में ठगी करते थे और साप्ताहिक अवकाश पर पर्वतीय इलाकों में मस्ती करने चले जाते थे।





आगे की कार्रवाई


पुलिस ने फहाद के साथ अन्य आरोपी की तलाश जारी है, जो फर्जी आईडी के सिम कार्ड और बैंक खाते उपलब्ध कराता था। इस मामले में और अधिक खुलासे की उम्मीद की जा रही है, और पीड़ितों से ठगी गई रकम की वसूली के प्रयास किए जा रहे हैं।

इस प्रकार, गाजियाबाद की पुलिस ने बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर देशभर के लोगों को राहत दी है।




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सावधान! बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी के मामलों में बढ़ोतरी


प्रिय नागरिकों,

हाल ही में गाजियाबाद की साइबर थाना पुलिस ने बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने नौ राज्यों में 39 से अधिक ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया है। इसके चलते कई लोग अपनी मेहनत की कमाई खो चुके हैं।


ठगों के तरीके:


  • ठग एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस या किसी अन्य बीमा कंपनी के कर्मचारी बनकर आपको कॉल करते हैं।
  • वे आपके बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण का बहाना बनाते हैं और प्रीमियम जमा करने के लिए पैसे मांगते हैं।
  • पीड़ित की पॉलिसी के प्रीमियम वास्तव में लंबित होते हैं, और आप उनके बताए खाते में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।
  • इसके बाद, ठग फर्जी रसीद भेजते हैं और आपकी मेहनत की कमाई ले लेते हैं।


संवेदनशीलता बरतें:

  1. कॉल पर सतर्क रहें: यदि कोई अज्ञात कॉलर बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण या किसी अन्य वित्तीय लेन-देन के बारे में बात करता है, तो उसकी वैधता की पुष्टि अवश्य करें।
  2. कंपनी की वेबसाइट पर जांचें: बीमा पॉलिसी से संबंधित किसी भी लेन-देन के लिए सीधे अपनी बीमा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ग्राहक सेवा से संपर्क करें।
  3. कोई भी वित्तीय जानकारी साझा करने से पहले सुनिश्चित करें: अगर आपको किसी फोन कॉल या ईमेल पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा जाए, तो पहले उसकी सत्यता की जांच करें।
  4. फर्जी दस्तावेजों से सतर्क रहें: यदि आपको किसी भी वित्तीय दस्तावेज या रसीद पर संदेह है, तो उसे ध्यानपूर्वक जांचें और आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।




आवश्यक कार्रवाई:

यदि आप इस तरह की ठगी का शिकार हुए हैं या आपको संदेह है कि आप ठगी का शिकार हो सकते हैं, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर थाने से संपर्क करें। आपकी सतर्कता और रिपोर्टिंग से दूसरों को इस ठगी से बचाया जा सकता है।

सतर्क रहें और सुरक्षित रहें!




आपकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।




बीमा पॉलिसी ठगी से बचने के तरीके

प्रिय नागरिकों,

बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी की घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए, यह आवश्यक है कि आप सतर्क रहें और अपनी सुरक्षा के लिए निम्नलिखित कदम उठाएं:

1. संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें:

  • अज्ञात कॉल्स और ईमेल्स: कभी भी अज्ञात कॉलर या ईमेल से आपकी पॉलिसी के नवीनीकरण या अन्य वित्तीय लेन-देन के बारे में जानकारी प्राप्त करने पर, उसकी वैधता की पुष्टि करें। कोई भी संदेहास्पद कॉल या संदेश प्राप्त होने पर, उसकी जाँच करने के लिए सीधे अपनी बीमा कंपनी से संपर्क करें।

  • आधिकारिक चैनल: किसी भी वित्तीय जानकारी, जैसे कि पॉलिसी प्रीमियम या व्यक्तिगत जानकारी को साझा करने से पहले, हमेशा कंपनी के आधिकारिक चैनल का ही उपयोग करें।

2. बीमा कंपनी की वेबसाइट और संपर्क जानकारी की पुष्टि करें:

  • वेबसाइट पर जांचें: बीमा पॉलिसी से संबंधित किसी भी लेन-देन के लिए सीधे अपनी बीमा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और वहां से संपर्क विवरण प्राप्त करें।

  • ग्राहक सेवा से संपर्क करें: किसी भी संदेह या समस्याओं के लिए अपनी बीमा कंपनी की ग्राहक सेवा से संपर्क करें। वे आपको सही जानकारी और सहायता प्रदान करेंगे।

3. फर्जी दस्तावेजों से सावधान रहें:

  • रसीद और दस्तावेज: आपको मिलने वाली किसी भी रसीद या दस्तावेज की जांच करें। यदि दस्तावेज पर कोई भी संदिग्धता हो, तो उसे सत्यापित करने के लिए अपनी बीमा कंपनी से संपर्क करें।

  • सत्यापन: यदि आपको कोई संदिग्ध दस्तावेज प्राप्त होता है, तो उसे वेरिफाई करने के लिए सीधे कंपनी के ग्राहक सेवा विभाग से पुष्टि करें।

4. सिक्योरिटी प्रोटोकॉल का पालन करें:

  • पासवर्ड सुरक्षा: अपने बीमा खाते और अन्य महत्वपूर्ण खातों के पासवर्ड को मजबूत बनाएं और नियमित रूप से उसे बदलें। कभी भी एक ही पासवर्ड का उपयोग विभिन्न खातों के लिए न करें।

  • दो-चरणीय प्रमाणीकरण: यदि संभव हो, तो अपने खातों में दो-चरणीय प्रमाणीकरण को सक्रिय करें, जो आपके अकाउंट को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है।

5. ठगी की रिपोर्ट करें:

  • पुलिस या साइबर थाने से संपर्क करें: यदि आप ठगी का शिकार हो गए हैं या ठगी की कोई जानकारी प्राप्त होती है, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर थाने से संपर्क करें और अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

  • फीडबैक दें: ठगी के मामलों की रिपोर्ट करना अन्य लोगों को चेतावनी देने और ठगों को पकड़ने में मदद करता है।

6. शिक्षा और जागरूकता:

  • संवेदनशीलता: आप अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए इस विषय पर जागरूकता फैलाएं। अपने परिवार और दोस्तों को भी बीमा ठगी के बारे में जानकारी दें और सतर्क रहने के लिए प्रेरित करें।

ध्यान रखें कि सतर्कता और जानकारी ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है। उपरोक्त सुझावों का पालन करके आप बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी से बच सकते हैं और अपने वित्तीय सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकते हैं।

सुरक्षित रहें और सतर्क रहें!



बीमा पॉलिसी ठगी के मामलों में शिकायत करने के लिए गाइड

प्रिय नागरिकों,

यदि आपने बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी का शिकार किया है या आपको किसी ठगी की घटना के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है, तो निम्नलिखित चैनलों के माध्यम से आप अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं:

1. स्थानीय पुलिस स्टेशन:

  • शिकायत दर्ज करें: अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन में जाकर ठगी की शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस आपकी शिकायत की जांच करेगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी।

  • साइबर थाने से संपर्क: कुछ क्षेत्रों में विशेष साइबर थाने होते हैं जो साइबर अपराधों की जांच करते हैं। यदि आपके इलाके में साइबर थाना है, तो वहाँ जाकर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

2. साइबर क्राइम पोर्टल:

  • राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल: भारत सरकार ने एक राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) स्थापित किया है। यहाँ आप ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं और अपनी शिकायत की स्थिति की ट्रैकिंग कर सकते हैं।

3. बीमा कंपनी की ग्राहक सेवा:

  • बीमा कंपनी से संपर्क करें: आपकी बीमा कंपनी की ग्राहक सेवा विभाग से संपर्क करके ठगी की जानकारी दें। वे आपको मदद करेंगे और आपके मामले को उचित विभाग को रिपोर्ट करेंगे।

  • ऑनलाइन शिकायत: अधिकांश बीमा कंपनियों की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने का विकल्प होता है। कंपनी की वेबसाइट पर जाकर आप अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

4. फाइनेंशियल ओम्बुड्समैन:

  • बीमा कंपनियों के लिए फाइनेंशियल ओम्बुड्समैन: यदि आप अपनी बीमा कंपनी द्वारा समाधान नहीं मिलने से परेशान हैं, तो आप बीमा रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) के फाइनेंशियल ओम्बुड्समैन से शिकायत कर सकते हैं। IRDAI की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करने के लिए विवरण उपलब्ध होते हैं।

5. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI):

  • डिजिटल ठगी के मामलों में TRAI से संपर्क करें: यदि ठगी से संबंधित कॉल या एसएमएस आपकी सेवा प्रदाता कंपनी के माध्यम से आया है, तो आप TRAI की वेबसाइट पर जाकर शिकायत कर सकते हैं।

6. अन्य नियामक और सरकारी एजेंसियाँ:

  • कंज़्यूमर फोरम: यदि आप कंज़्यूमर फोरम में अपनी शिकायत दर्ज करना चाहते हैं, तो स्थानीय उपभोक्ता फोरम से संपर्क करें। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत, आप भी अपने मामले की सुनवाई करवा सकते हैं।

  • राष्ट्रीय कंज़्यूमर हेल्पलाइन: आप 1800-11-4000 पर कॉल करके भी उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकते हैं और सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

7. सोशल मीडिया और ऑनलाइन मंच:

  • सार्वजनिक चेतावनी: यदि आप चाहते हैं कि अन्य लोग भी ठगी से बच सकें, तो आप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी कहानी साझा कर सकते हैं और जागरूकता फैला सकते हैं।

इन चैनलों के माध्यम से आप अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और ठगी के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित कर सकते हैं। आपकी शिकायत से न केवल आपकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि अन्य संभावित पीड़ितों को भी चेतावनी मिलेगी।

सुरक्षित रहें और सतर्क रहें!





फर्जी कॉल को कैसे पहचानें: महत्वपूर्ण संकेत और सावधानियाँ


प्रिय नागरिकों,

फर्जी कॉल्स और स्कैम कॉल्स से बचने के लिए सतर्क रहना अत्यंत आवश्यक है। इन कॉल्स के माध्यम से ठग आपकी व्यक्तिगत जानकारी, वित्तीय जानकारी, या पैसे ठग सकते हैं। यहां कुछ महत्वपूर्ण संकेत दिए गए हैं जो आपको फर्जी कॉल्स पहचानने में मदद कर सकते हैं:

1. अज्ञात नंबर या अनचाहे कॉल:

  • नंबर की जाँच करें: यदि कॉल आपके पंजीकृत नंबर से नहीं है या यदि नंबर अज्ञात है, तो सतर्क रहें। विश्वसनीय कंपनियाँ आमतौर पर आपको अपने पंजीकृत नंबर से ही कॉल करती हैं।

2. आपातकालीन या तुरंत कार्यवाही की मांग:

  • त्वरित कार्रवाई का दबाव: फर्जी कॉल्स अक्सर आपको त्वरित निर्णय लेने या पैसे ट्रांसफर करने का दबाव डालती हैं। यदि कॉलर आपसे तुरंत कोई कार्यवाही या पैसे की मांग करता है, तो यह एक चेतावनी संकेत हो सकता है।

3. संवेदी जानकारी की मांग:

  • व्यक्तिगत जानकारी: कॉलर आपकी व्यक्तिगत जानकारी जैसे कि बैंक विवरण, आधार नंबर, या पिन कोड मांगते हैं। कभी भी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी अनजान कॉलर्स के साथ साझा न करें।

4. कंपनी या संस्था का झूठा दावा:

  • झूठा दावा: कॉलर यह दावा कर सकता है कि वह एक प्रमुख कंपनी, बैंक, या सरकारी संस्था से है। कभी भी इस दावे पर विश्वास न करें और कंपनी के आधिकारिक चैनलों के माध्यम से सत्यापन करें।

5. भ्रामक या अत्यधिक लाभ का वादा:

  • लाभ का झूठा वादा: कॉलर अक्सर आपको तुरंत धन, पुरस्कार, या लाभ का वादा करता है। यदि कुछ भी असामान्य रूप से अच्छा लगता है, तो सतर्क रहें।

6. भ्रामक लिंक या फोन नंबर:

  • लिंक और नंबर: कॉलर आपको एक लिंक पर क्लिक करने के लिए कह सकता है या किसी संदिग्ध फोन नंबर पर कॉल करने के लिए कह सकता है। ऐसे लिंक और नंबर से दूर रहें और कभी भी उन पर क्लिक न करें।

7. भाषा और व्यवहार:

  • अनुचित भाषा: ठग कॉल्स अक्सर अत्यधिक आग्रहपूर्ण, धमकाने वाली या आक्रामक हो सकती हैं। यदि कॉलर का व्यवहार असामान्य लगता है, तो यह फर्जी कॉल हो सकती है।

8. नकली ऑफ़र या सेवाएं:

  • नकली ऑफ़र: कॉलर आपको आकर्षक ऑफ़र या सेवाएं प्रदान करने का दावा कर सकता है जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं। ऐसी कॉल्स से सतर्क रहें और आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।

9. रिवर्स कॉल बैक:

  • कॉल बैक: अगर आप किसी संदिग्ध कॉल से संपर्क में हैं, तो कॉलर द्वारा दिए गए नंबर पर कॉल बैक करने से बचें। इस नंबर पर कॉल करके आप खुद को और भी धोखाधड़ी का शिकार बना सकते हैं।

10. सरकारी और बैंक कॉल्स की जाँच:

  • आधिकारिक कॉल्स की जाँच: यदि आपको सरकारी या बैंक से कॉल प्राप्त होती है, तो आपको उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर या उनकी ग्राहक सेवा से संपर्क करके सत्यापन करना चाहिए।

आवश्यक कार्रवाई:

  • शिकायत दर्ज करें: यदि आप एक फर्जी कॉल का शिकार हो जाते हैं या आपको लगता है कि कॉल धोखाधड़ी से संबंधित हो सकती है, तो स्थानीय पुलिस या साइबर थाने में शिकायत दर्ज करें।

  • ऑनलाइन रिपोर्टिंग: कई देशों में साइबर क्राइम या ठगी की रिपोर्टिंग के लिए ऑनलाइन पोर्टल्स उपलब्ध हैं। इन पोर्टल्स पर जाकर आप अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

सतर्कता ही सबसे अच्छा सुरक्षा उपाय है। उपरोक्त संकेतों के आधार पर आप फर्जी कॉल्स को पहचान सकते हैं और अपने आप को ठगी से बचा सकते हैं।

सुरक्षित रहें और सतर्क रहें!




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