322635194 OPS: कैसे बहाल हो पुरानी पेंशन, NPS को OPS में बदलकर सरकार सालाना पा सकती है एक लाख करोड़ का राजस्व

OPS: कैसे बहाल हो पुरानी पेंशन, NPS को OPS में बदलकर सरकार सालाना पा सकती है एक लाख करोड़ का राजस्व

OPS: कैसे बहाल हो पुरानी पेंशन, NPS को OPS में बदलकर सरकार सालाना पा सकती है एक लाख करोड़ का राजस्व

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नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) का प्रारंभ

  • सरकार का उद्देश्य

डॉ. मंजीत पटेल के अनुसार, सरकार ने 01.01.2004 से पुरानी पेंशन व्यवस्था को छोड़कर नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) लागू किया, जिसका मकसद आर्थिक बोझ को कम करना और पेंशन के लिए मार्केट से व्यवस्था करना था।


  • राज्यों में एनपीएस का लागू होना

पश्चिम बंगाल को छोड़कर सभी राज्यों में अलग-अलग समय पर इस नई पेंशन व्यवस्था को लागू कर दिया गया। पिछले सात-आठ वर्षों से इस व्यवस्था के खिलाफ राज्यों और केंद्र में बड़े-बड़े आंदोलन हो रहे हैं।

पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली पर बहस


  • कर्मचारी संगठनों की मांग

देश में 'पुरानी पेंशन' बहाली को लेकर तीखी बहस छिड़ी है। सरकारी कर्मचारी संगठन लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि उन्हें गारंटीकृत पुरानी पेंशन चाहिए। 


  • वित्त मंत्रालय की चर्चा

वित्त मंत्रालय की कमेटी ने 15 जुलाई को स्टाफ साइड 'जेसीएम' के प्रतिनिधियों से चर्चा की थी, लेकिन कर्मचारी संगठन सरकार के सुधार प्रस्तावों से सहमत नहीं थे। सरकार केवल एनपीएस सुधार पर बात करना चाहती है, जबकि कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की मांग कर रहे हैं।


 एनपीएस और ओपीएस में अंतर



  • पुरानी पेंशन व्यवस्था (ओपीएस)

पुरानी पेंशन में जीपीएफ के तहत न्यूनतम 7 प्रतिशत अंशदान लिया जाता था। इसे कर्मचारी अपनी मर्जी से बेसिक सैलरी के बराबर कटवा सकता था और सरकार ब्याज की गारंटी देती थी। सेवानिवृत्ति पर यह पूरा पैसा एकमुश्त मिल जाता था और अंतिम सैलरी का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता था।


  • नई पेंशन व्यवस्था (एनपीएस)

एनपीएस में जीपीएफ की तरह 10 प्रतिशत अंशदान लिया जाता है और सरकार 14 प्रतिशत अंशदान करती है। यह पैसा शेयर मार्केट में निवेश किया जाता है और ब्याज की कोई गारंटी नहीं होती।


एनपीएस की समस्याएँ


  • कम पेंशन का मुद्दा

पटेल बताते हैं कि एनपीएस व्यवस्था उन कर्मचारियों के लिए अभिशाप बन गई है, जिनकी सेवानिवृत्ति 15-20 साल की नौकरी के बाद हो रही है। इस कारण उन्हें बहुत कम पेंशन मिल रही है।


  • पुरानी पेंशन की गारंटी

पुरानी पेंशन में गारंटी थी कि किसी की पेंशन 9000 रुपये से कम नहीं हो सकती थी।


एनपीएस में बदलाव के सुझाव


  • अंशदान की व्यवस्था

डॉ. पटेल के अनुसार, एनपीएस को बिना खत्म किए कुछ बदलाव करके इसे ओपीएस जैसा बनाया जा सकता है। एनपीएस में सरकार को 14 प्रतिशत अंशदान करना पड़ता है, जबकि ओपीएस में ऐसा नहीं था। 


  • फिक्स्ड ब्याज की व्यवस्था

एनपीएस में अंशदान को जीपीएफ की तरह फिक्स ब्याज दिया जाए तो यह संभव है कि कर्मचारी अपने अंशदान को बढ़ा सकें।


  • बैंकों के लिए फायदेमंद

एनपीएस का रिटर्न हमेशा जीपीएफ से ज्यादा रहा है, इसलिए 7 प्रतिशत गारंटी देना भी मुश्किल नहीं है। इससे बैंकिंग सेक्टर को भी फायदा होगा, क्योंकि 85 लाख कर्मचारियों से 6000 करोड़ रुपये हर महीने मिलते हैं।


रिटायरमेंट पर 50% पेंशन की व्यवस्था


  • सरकार का अंशदान

डॉ. पटेल के अनुसार, रिटायरमेंट पर 50 प्रतिशत पेंशन देने का प्रावधान भी ज्यादा मुश्किल नहीं है। सरकार के 14 प्रतिशत अंशदान के रिटर्न के आधार पर ओपीएस के बराबर पेंशन दी जा सकती है।


  • फैमिली पेंशन का प्रावधान

मृत पेंशनर के परिवार को अंतिम पेंशन का 60 प्रतिशत फैमिली पेंशन के रूप में देना होता है। ज्यादातर पेंशनर रिटायरमेंट के बाद 70 वर्ष की उम्र तक जीवित नहीं रहते, जिससे पेंशन खर्च कम होता जाता है।

 

स्थायी पेंशन फंड की संभावना


  • परमानेंट पेंशन फंड

इस प्रकार की व्यवस्था से एक परमानेंट पेंशन फंड तैयार हो सकता है और सरकार प्रति वर्ष 1 लाख करोड़ रुपये तक की वापसी कर सकती है।


  • सेवा वर्षों का प्रावधान

राज्यों में अलग-अलग सेवा वर्षों की सेवा के आधार पर पेंशन का प्रावधान किया जा सकता है, जिससे सरकार पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा।

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