322635194 अभिभावकों के लिए बड़ी खबर! प्राइवेट स्कूलों की मनमानी खत्म :अब किताब और ड्रेस को लेकर नहीं चलेगी मनमानी

अभिभावकों के लिए बड़ी खबर! प्राइवेट स्कूलों की मनमानी खत्म :अब किताब और ड्रेस को लेकर नहीं चलेगी मनमानी

अभिभावकों के लिए बड़ी खबर! प्राइवेट स्कूलों की मनमानी खत्म – सरकार ने जारी किए नए सख्त नियम!


👉 क्या आपका बच्चा भी प्राइवेट स्कूल में पढ़ता है?  
👉 क्या आप पर किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाया जाता है?  

अब ऐसा नहीं चलेगा! सरकार ने स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। नियम तोड़ने पर स्कूल की मान्यता भी रद्द हो सकती है!  

जानिए पूरे नियम और अपने अधिकार – पूरी खबर पढ़ें! 




अभिभावकों के लिए जरूरी सूचना: प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर सख्ती, नए निर्देश जारी



प्राइवेट स्कूलों द्वारा छात्रों और अभिभावकों पर किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य आवश्यक सामग्री विशेष दुकानों से खरीदने के लिए दबाव डालने की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। इस संबंध में प्रशासन द्वारा सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यदि कोई भी स्कूल इन आदेशों का उल्लंघन करता है, तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।



इसको भी पढ़ें 

लोन की किस्त न भर पाने वाले लोगों को मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत: बैंकों को तत्काल निर्देश!






अभिभावकों की शिकायतों पर प्रशासन की सख्ती

प्राइवेट स्कूलों द्वारा छात्रों को विशेष वेंडर्स से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करने की शिकायतें मिलने के बाद मुख्य विकास अधिकारी (C.D.O) प्रतिभा सिंह ने संज्ञान लिया है। उन्होंने साफ निर्देश दिए हैं कि यदि कोई स्कूल ऐसा करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी ने स्कूल संचालकों और प्रबंधकों को पत्र जारी किया है। इसके अलावा, जिलाधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक को भी इसकी सूचना भेजी गई है।




इसको भी पढ़ें 

सावधान! साइबर ठगों का नया जाल – फोटो क्लिक करते ही खाली हो सकता है बैंक अकाउंट






शिकायतकर्ताओं की मांग और प्रशासन की प्रतिक्रिया

प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस के राष्ट्रीय संयोजक दीपक सिंह सरीन और अभिभावक संघ, श्री बांके बिहारी एजुकेशनल सोसाइटी के संरक्षक डॉ. मदन मोहन शर्मा ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उनकी शिकायत के अनुसार:

  • कुछ निजी स्कूल अभिभावकों को अपनी मनमानी से निर्धारित दुकानों से ही पाठ्यपुस्तकें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

  • विद्यालय प्रबंधक और प्रधानाचार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन कर रहे हैं।

  • सरकारी मान्यता प्राप्त किताबों की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें स्कूलों में लागू कराई जा रही हैं, जिससे अभिभावकों को आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है।

मुख्य विकास अधिकारी ने इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए निर्देश जारी किए हैं कि सभी स्कूलों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और राज्य सरकार की निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली 2011 का पालन करना होगा।




इसको भीबपढ़ें

NPCI ने UPI यूजर्स को किया अलर्ट: पैन कार्ड 2.0 फ्रॉड से रहें सावधान!







नए दिशा-निर्देश: प्राइवेट स्कूलों के लिए कड़े नियम

सरकार द्वारा जारी नए नियमों के तहत निजी स्कूलों को निम्नलिखित निर्देशों का पालन करना होगा:

1. शिक्षा के व्यावसायीकरण पर रोक

  • कोई भी मान्यता प्राप्त स्कूल किसी व्यक्ति, संस्था या समूह को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित नहीं किया जाएगा।

  • स्कूल प्रबंधन को शिक्षा को व्यापारिक दृष्टि से संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

2. मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम का पालन अनिवार्य

  • सभी विद्यालयों को बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम और पुस्तकों का ही उपयोग करना होगा।

  • कोई भी विद्यालय अपनी मर्जी से निजी प्रकाशकों की किताबें छात्रों पर नहीं थोप सकता।




इसको भी पढ़ें








3. स्कूल भवनों और परिसरों का गैर-शैक्षिक उपयोग प्रतिबंधित

  • किसी भी निजी या सरकारी मान्यता प्राप्त विद्यालय के भवन या परिसर का उपयोग व्यावसायिक या आवासीय उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकेगा।

  • स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि विद्यालय केवल शैक्षणिक गतिविधियों के लिए ही उपयोग में आए।

4. शासनादेश 2023 का पालन अनिवार्य

  • अशासकीय प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों को 26 सितंबर 2023 को जारी शासनादेश का पूरी तरह से पालन करना होगा।

  • यदि कोई स्कूल इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसकी मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।









अभिभावकों को राहत: प्रशासन के कड़े कदम

सरकार और प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि कोई भी निजी विद्यालय अभिभावकों और छात्रों पर आर्थिक बोझ नहीं डाल सकता। यदि किसी स्कूल द्वारा अनावश्यक रूप से किताबों और यूनिफॉर्म की खरीदारी को लेकर दबाव बनाया जाता है, तो इसकी शिकायत सीधे जिला प्रशासन से की जा सकती है।

यह कदम अभिभावकों को राहत देने और शिक्षा को व्यवसायीकरण से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है। अब देखना यह होगा कि इन नियमों का पालन कराने के लिए प्रशासन किस हद तक सख्ती बरतता है।

Post a Comment

Previous Post Next Post